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दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) की कार्यप्रणाली निलंबित, अस्पतालों में दवा आपूर्ति पर पड़ेगा असर
ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 11:37 am

दिल्ली सरकार ने केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के माध्यम से होने वाली दवाओं और उपकरणों की केंद्रीकृत खरीद को निलंबित कर दिया है। नई प्रणाली लागू होने तक यह एक अंतरिम उपाय है।
दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के खरीद कार्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के लिए दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को जारी एक आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निलंबन एक अंतरिम उपाय है, जो तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि खरीद के लिए एक नई और संशोधित रूपरेखा तैयार नहीं कर ली जाती।
केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) दिल्ली के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका प्राथमिक कार्य विभिन्न अस्पतालों की मांग को समेकित करना और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से थोक में दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद सुनिश्चित करना है। इस एजेंसी के माध्यम से होने वाली खरीद से न केवल लागत में कमी आती है, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण भी बना रहता है। हालांकि, सरकार अब इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है ताकि इसे अधिक कुशल और उत्तरदायी बनाया जा सके।
आदेश में कहा गया है कि जब तक नई प्रणाली लागू नहीं होती, तब तक अस्पतालों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। हालांकि सरकार ने अभी तक वैकल्पिक दिशानिर्देशों का पूरा विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि अस्पताल स्तर पर खरीद की शक्तियों को अस्थायी रूप से बढ़ाया जा सकता है ताकि मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की कमी न हो। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों मरीज आते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से होता है, जो मुफ्त दवाओं के लिए पूरी तरह से सरकारी आपूर्ति पर निर्भर हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर वे जो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, यह खबर चिंता का विषय हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई प्रवासी भारतीयों के बुजुर्ग माता-पिता और रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं और अक्सर वहां की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में किसी भी प्रकार का बदलाव सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और उपलब्धता को प्रभावित करता है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय मूल के चिकित्सा पेशेवर भी भारत की स्वास्थ्य नीतियों और प्रशासनिक सुधारों पर कड़ी नजर रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद प्रक्रिया का यह पुनर्गठन पारदर्शिता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) की बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। पिछले कुछ समय में आपूर्ति में देरी और कुछ दवाओं की कमी की शिकायतों के बाद, प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई खरीद नीति कैसी होगी और क्या यह सरकारी अस्पतालों में दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने में सफल हो पाएगी। दिल्ली सरकार का लक्ष्य एक ऐसा मॉडल तैयार करना है जो भ्रष्टाचार मुक्त हो और जिसमें जवाबदेही तय की जा सके।
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