राजनीति
दिल्ली हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल खत्म: अधिकार क्षेत्र विवाद के बीच काम पर लौटे वकील
ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 09:36 am

दिल्ली उच्च न्यायालय के वकीलों ने जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र में बढ़ोतरी के प्रस्ताव के खिलाफ चल रही अपनी हड़ताल को अस्थायी रूप से वापस ले लिया है।
देश की राजधानी दिल्ली में कानूनी कामकाज एक बार फिर सामान्य पटरी पर लौट आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के वकीलों ने जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र (pecuniary jurisdiction) को बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ अपनी हड़ताल को अस्थायी रूप से वापस लेने का फैसला किया है। गुरुवार को वकीलों के काम पर लौटने के साथ ही पिछले कुछ दिनों से लंबित पड़े मामलों की सुनवाई फिर से शुरू हो गई है।
विवाद की मुख्य जड़ जिला अदालतों की वित्तीय सीमाओं में होने वाला प्रस्तावित बदलाव है। वर्तमान में, 2 करोड़ रुपये तक के दीवानी मामलों की सुनवाई जिला अदालतों में होती है, जबकि इससे अधिक मूल्य के मामले सीधे उच्च न्यायालय में जाते हैं। सरकार और संबंधित अधिकारियों द्वारा इस सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) कड़ा विरोध कर रही है। वकीलों का तर्क है कि इस बदलाव से उच्च न्यायालय के कार्यक्षेत्र पर असर पड़ेगा और अदालती प्रक्रिया की गति प्रभावित हो सकती है।
हड़ताल के दौरान अदालती कार्यवाही ठप रहने से आम जनता, विशेषकर उन लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जिनके मामले अंतिम चरण में थे। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि काम पर लौटने का निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, हालांकि वे अपनी मांगों पर अभी भी कायम हैं। एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे भविष्य में फिर से विरोध का रास्ता अपना सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई प्रवासी भारतीयों के संपत्ति विवाद, पारिवारिक मामले और वाणिज्यिक मुकदमे दिल्ली की अदालतों में लंबित हैं। अदालती कामकाज में होने वाली देरी सीधे तौर पर उन लोगों को प्रभावित करती है जो विदेश से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अधिकार क्षेत्र में बदलाव का मतलब यह हो सकता है कि कई प्रवासी भारतीयों के चल रहे मामले अब एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित किए जाएंगे, जिससे कानूनी खर्च और समय दोनों बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अदालतों के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि से उच्च न्यायालय पर बोझ कम होगा, लेकिन इसके लिए जिला स्तर पर बुनियादी ढांचे और न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि आवश्यक है। फिलहाल, वकीलों और प्रशासन के बीच बातचीत के रास्ते खुले हैं, और कानूनी जगत की नजरें अब इस विवाद के स्थायी समाधान पर टिकी हैं। वकीलों की इस वापसी से उन हजारों मुवक्किलों को बड़ी राहत मिली है जो न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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