टेक्नोलॉजी
ब्रह्मांडीय रहस्य से उठा पर्दा: IceCube वेधशाला ने सुदूर 'स्टारबर्स्ट गैलेक्सी' से आने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो का लगाया पता
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:42 pm

अंटार्कटिका स्थित आइसक्यूब वेधशाला ने अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित 'शैडो ब्लास्टर' गैलेक्सी से आए एक अत्यंत शक्तिशाली न्यूट्रिनो कण की पहचान की है।
खगोल भौतिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, वैज्ञानिकों ने पहली बार एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो (Neutrino) के सटीक स्रोत का पता लगाया है। अंटार्कटिका की बर्फ में दबी 'आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी' (IceCube Neutrino Observatory) ने इस रहस्यमयी कण को पकड़ा है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि यह अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक 'स्टारबर्स्ट गैलेक्सी' से आया है। इस सुदूर गैलेक्सी को वैज्ञानिकों ने 'शैडो ब्लास्टर' (Shadow Blaster) का नाम दिया है।
न्यूट्रिनो, जिन्हें अक्सर 'घोस्ट पार्टिकल्स' या अदृश्य कण भी कहा जाता है, ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी कणों में से एक हैं। इनका द्रव्यमान लगभग शून्य होता है और ये प्रकाश की गति के करीब चलते हैं। चूंकि इन पर कोई विद्युत आवेश (Electric Charge) नहीं होता, इसलिए ये तारों, ग्रहों और यहां तक कि हमारे शरीर के पार भी बिना किसी प्रभाव के निकल जाते हैं। यही कारण है कि इन्हें पकड़ना और इनके स्रोत का पता लगाना दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है।
इस खोज की सबसे खास बात 'गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग' (Gravitational Lensing) की तकनीक है। 'शैडो ब्लास्टर' नामक यह गैलेक्सी सीधे तौर पर दिखाई नहीं देती, लेकिन इसके सामने स्थित एक अन्य विशाल पिंड के गुरुत्वाकर्षण ने इसके प्रकाश और संकेतों को एक लेंस की तरह मोड़कर बढ़ा दिया। इसी बढ़े हुए सिग्नल की मदद से आइसक्यूब के सेंसरों ने उस उच्च-ऊर्जा वाले कण को रिकॉर्ड किया, जो अंतरिक्ष की गहराइयों से धरती तक पहुंचा था। स्टारबर्स्ट गैलेक्सी वे होती हैं जहाँ तारों का निर्माण बहुत तीव्र गति से होता है, और माना जाता है कि ऐसी जगहें ब्रह्मांडीय किरणों (Cosmic Rays) का मुख्य स्रोत हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के वैज्ञानिक समुदाय के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, जो स्क्वायर किलोमीटर ऐरे (SKA) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय टेलीस्कोप प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है, खगोल विज्ञान में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। भारतीय मूल के कई शोधकर्ता और छात्र सिडनी, मेलबर्न और पर्थ के विश्वविद्यालयों में एस्ट्रोफिजिक्स के क्षेत्र में सक्रिय हैं। यह खोज न केवल ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों को समझने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में डेटा विश्लेषण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक सहयोग के नए रास्ते भी खोलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज 'मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी' के एक नए युग की शुरुआत है। अब तक हम ब्रह्मांड को केवल प्रकाश (टेलीस्कोप) के माध्यम से देखते आए हैं, लेकिन अब न्यूट्रिनो जैसे कणों के जरिए हम उन हिंसक और ऊर्जावान घटनाओं को भी समझ सकेंगे जो अब तक छिपी हुई थीं। 'शैडो ब्लास्टर' से आए इस न्यूट्रिनो ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और वैश्विक सहयोग से हम अंतरिक्ष के उन कोनों तक भी झाँक सकते हैं, जहाँ पहुंचना कभी नामुमकिन लगता था।
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