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विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल और प्रियंका गांधी समेत कई कांग्रेस नेता हिरासत में, बाद में मिली रिहाई

ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 11:35 am
विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल और प्रियंका गांधी समेत कई कांग्रेस नेता हिरासत में, बाद में मिली रिहाई

दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को हिरासत में लिया। वे प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

नई दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी उस समय बढ़ गई जब दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के कई अन्य दिग्गज नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और नेता राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। विरोध प्रदर्शन का आयोजन विशेष रूप से देश की शिक्षा प्रणाली में हालिया अनियमितताओं और कथित प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ किया गया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और नैतिकता के आधार पर जिम्मेदार मंत्रियों को पद छोड़ देना चाहिए। राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि करोड़ों छात्रों की आवाज है जिनके सपनों को भ्रष्टाचार और अक्षमता के कारण कुचला जा रहा है। जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद भवन और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग कर दी। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब नेताओं ने बैरिकेड्स लांघने की कोशिश की। इसके बाद, पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के चलते राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेकर पास के एक पुलिस स्टेशन ले गई। प्रियंका गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध करना हमारा अधिकार है और सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की ये राजनीतिक हलचलें काफी महत्वपूर्ण हैं। प्रवासी भारतीय, जो अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अक्सर भारतीय संस्थानों की ओर देखते हैं, वहां की शिक्षा प्रणाली में आ रहे संकटों को लेकर चिंतित हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे भारतीय प्रवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन घटनाक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, क्योंकि भारत में स्थिरता और पारदर्शिता का सीधा असर विदेशी निवेश और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि पर पड़ता है। देर शाम, स्थिति सामान्य होने और विरोध कम होने के बाद सभी हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया गया। हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती। विपक्षी दल अब इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में जोर-शोर से उठाने की योजना बना रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने के आसार हैं।
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