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GPM: फर्जी नामांतरण मामले में प्रशासनिक हड़कंप, मरवाही में पटवारी निलंबित

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 04:30 pm
GPM: फर्जी नामांतरण मामले में प्रशासनिक हड़कंप, मरवाही में पटवारी निलंबित

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में आदिवासी भूमि के अवैध नामांतरण मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित कर दिया है।

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में राजस्व प्रशासन ने एक गंभीर धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मरवाही तहसील के ग्राम मगुरदा में एक आदिवासी परिवार की पैतृक भूमि के फर्जी नामांतरण का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह मामला सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और पद के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मगुरदा के एक आदिवासी परिवार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पुश्तैनी जमीन को उनकी जानकारी के बिना किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया है। जब पीड़ित परिवार ने राजस्व विभाग के रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे। जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि हल्का पटवारी ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में लापरवाही बरती और नियमों को ताक पर रखकर फर्जी नामांतरण को अंजाम देने में भूमिका निभाई। प्रशासनिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस स्तर की धोखाधड़ी संभव नहीं थी। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने निलंबन का आदेश जारी किया। यह घटनाक्रम प्रवासी भारतीय समुदायों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उन भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है जिनकी पैतृक संपत्ति आज भी भारत में स्थित है। अक्सर दूर रहने के कारण ऐसी संपत्तियों पर भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों की नजर रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासियों को समय-समय पर 'डिजिटल इंडिया' पोर्टल और 'भुइयां' जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी भूमि के रिकॉर्ड (RTC/खतौनी) की जांच करते रहनी चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल के वर्षों में राजस्व प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की ऐसी घटनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबित पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी और यदि अन्य अधिकारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन पर भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में विवादित भूमि के नामांतरण को रद्द करने और वास्तविक वारिसों का नाम पुनः दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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