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कनाडा में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों की एयरपोर्ट पर दोहरी जांच, जानें कारण और तैयारी के उपाय

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:42 pm
कनाडा में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों की एयरपोर्ट पर दोहरी जांच, जानें कारण और तैयारी के उपाय

कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों के लिए एयरपोर्ट पर अब सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है। जानिए क्यों हो रही है दोहरी जांच और छात्र इससे कैसे निपटें।

कनाडा हमेशा से भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में वहां की आव्रजन नीति और सुरक्षा प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। अब कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों को वहां के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर लैंड करने के बाद दो चरणों की सघन जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यह कदम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो पहली बार विदेश यात्रा कर रहे हैं, इसलिए यह समझना आवश्यक है कि यह प्रक्रिया क्या है और इसके पीछे के मुख्य कारण क्या हैं। एयरपोर्ट पर होने वाली पहली जांच आमतौर पर 'कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी' (CBSA) द्वारा की जाती है, जो प्राथमिक सीमा निरीक्षण है। यहां अधिकारी आपके पासपोर्ट और बेसिक ट्रेवल डिक्लेरेशन की जांच करते हैं। इसके बाद, छात्रों को एक दूसरे काउंटर पर भेजा जाता है जहां उन्हें अपना 'स्टडी परमिट' प्राप्त करना होता है। इस दूसरे चरण में आव्रजन अधिकारी आपके शैक्षणिक दस्तावेजों, विश्वविद्यालय के ऑफर लेटर (Letter of Acceptance) और आपकी वित्तीय स्थिति की गहनता से समीक्षा करते हैं। इसी चरण में सबसे अधिक समय लगता है और यहीं पर अक्सर 'डबल चेकिंग' की स्थिति बनती है। कनाडा सरकार ने इन जांचों को सख्त करने का निर्णय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के कारण लिया है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां छात्रों ने फर्जी एडमिशन लेटर के जरिए वीजा प्राप्त किया था। इसे रोकने के लिए, अब अधिकारी मौके पर ही शैक्षणिक संस्थानों के साथ दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। इसके अलावा, छात्रों से उनकी पढ़ाई के प्रति गंभीरता जानने के लिए कुछ बुनियादी सवाल भी पूछे जा सकते हैं, जैसे कि वे उसी कॉलेज में क्यों जा रहे हैं या उनके भविष्य के लक्ष्य क्या हैं। यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी एक संकेत है। जिस तरह कनाडा अपने नियमों को सख्त कर रहा है, उसी तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी नई 'माइग्रेशन स्ट्रेटजी' के तहत छात्रों के लिए अंग्रेजी भाषा की आवश्यकताओं और 'जेन्युइन स्टूडेंट' (GS) टेस्ट को कड़ा कर दिया है। दोनों ही देशों का मुख्य उद्देश्य अब केवल योग्य और वास्तविक छात्रों को ही अपने यहां प्रवेश देना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब केवल वीजा मिलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपके पास सभी मूल दस्तावेजों का होना और एयरपोर्ट पर पूछे गए सवालों का सही जवाब देना भी अनिवार्य है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सभी मूल दस्तावेजों को एक फोल्डर में अपने पास रखें, न कि चेक-इन बैगेज में। इसमें कॉलेज का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस, जीआईसी (GIC) सर्टिफिकेट, ट्यूशन फीस की रसीद और बैंक स्टेटमेंट शामिल होने चाहिए। यदि आप अपनी तैयारी पूरी रखते हैं और आत्मविश्वास के साथ जवाब देते हैं, तो एयरपोर्ट पर होने वाली यह दोहरी जांच आपके लिए महज एक सामान्य प्रक्रिया बनकर रह जाएगी।
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