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हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका का 'संवाद 2024': अमेरिका में युवा पीढ़ी के सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 06:30 pm

हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका के 'संवाद' कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों ने अपनी जड़ों से जुड़ने और भावी पीढ़ी को शिक्षित करने के महत्व पर चर्चा की।
वाशिंगटन में आयोजित 'हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका' (HUA) के विशेष कार्यक्रम 'संवाद 2024' में भारतीय मूल के प्रमुख नेताओं, शिक्षाविदों और छात्रों ने प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को अक्षुण्ण रखने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह चर्चा करना था कि कैसे हिंदू दर्शन और परंपराओं का गहरा अध्ययन नई पीढ़ी को अपने विश्वास के प्रति जागरूक और मुखर बना सकता है।
HUA के अध्यक्ष कल्याण विश्वनाथन ने अपने मुख्य भाषण में बताया कि विश्वविद्यालय ने 'हायर लर्निंग कमीशन' के साथ शैक्षणिक मान्यता (Accreditation) के लिए आवेदन कर दिया है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। विश्वनाथन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्रों में हिंदुओं का प्रतिनिधित्व कम है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से अकादमिक और सांस्कृतिक संस्थानों में भागीदारी करने का आह्वान किया ताकि भविष्य के ऐसे नेता और विद्वान तैयार किए जा सकें जो अपनी सभ्यता से जुड़े सवालों का आत्मविश्वास से जवाब दे सकें।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित 'प्रैक्टिस टू अंडरस्टैंडिंग टू आर्टिक्यूलेशन' नामक पैनल चर्चा में छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए। पैनल की संचालक डॉ. अर्चना श्यामसुंदर ने कहा कि कई हिंदू पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन तो करते हैं, लेकिन उनके पीछे के गहरे अर्थों से अनजान रहते हैं। उन्होंने कहा कि HUA छात्रों को इन परंपराओं के पीछे के 'क्यों' को समझने और उन्हें प्रामाणिक तरीके से आत्मसात करने का अवसर देता है।
एक छात्र मुक्ता त्यागराजन ने बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय में लगभग 20 पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जिससे उन्हें अपने पुराने विश्वासों पर सवाल उठाने और उन्हें फिर से समझने का मौका मिला। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि माता-पिता का शिक्षित होना अनिवार्य है, क्योंकि बच्चे अपनी संस्कृति और पहचान के बारे में उन्हीं से सवाल पूछते हैं। एक अन्य पैनलिस्ट और आव्रजन वकील अपर्णा दवे ने कहा कि इन पाठ्यक्रमों ने उन्हें अपनी जड़ों को एक व्यापक बौद्धिक दृष्टिकोण से देखने में मदद की है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह चर्चा प्रासंगिक है, क्योंकि वहां भी भारतीय मूल की आबादी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका की तरह ऑस्ट्रेलिया में भी प्रवासी परिवारों के सामने अपनी अगली पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़े रखने की चुनौती है। विश्व बैंक के पूर्व अधिकारी वरदराजन अतुर ने कहा कि धर्म को ऐतिहासिक और निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है, ताकि व्यक्तिगत आस्था और बौद्धिक जिज्ञासा के बीच संतुलन बना रहे।
1993 में स्थापित हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका एक निजी संस्थान है जो हिंदू परंपराओं, दर्शन, संस्कृत और योग के अध्ययन के लिए समर्पित है। यह अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिग्री और प्रमाण पत्र कार्यक्रम प्रदान करता है।
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