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भयंदर: आनंद दिघे मैदान में सो रहे प्रवासियों के सत्यापन की मांग, मनसे ने सुरक्षा चिंताओं का दिया हवाला

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 07:01 pm
भयंदर: आनंद दिघे मैदान में सो रहे प्रवासियों के सत्यापन की मांग, मनसे ने सुरक्षा चिंताओं का दिया हवाला

मुंबई के पास भयंदर में मनसे नेताओं ने आनंद दिघे मैदान में सो रहे प्रवासियों के पुलिस सत्यापन की मांग की है, जिससे सुरक्षा और प्रवासियों की स्थिति पर बहस छिड़ गई है।

महाराष्ट्र के भयंदर इलाके में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने स्थानीय पुलिस से आनंद दिघे मैदान में रात बिताने वाले प्रवासी श्रमिकों का औपचारिक सत्यापन करने की मांग की है। यह कदम तब उठाया गया जब मनसे के स्थानीय नेताओं ने मैदान का औचक निरीक्षण किया और वहां बड़ी संख्या में मजदूरों को खुले में सोते हुए पाया। मनसे नेताओं के अनुसार, देर रात किए गए इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि पास की इंदिरा नगर बस्ती के कई निवासी मैदान के खुले क्षेत्र का उपयोग सोने के लिए कर रहे थे। पूछताछ के दौरान, श्रमिकों ने बताया कि चिलचिलाती गर्मी और उनके टिन की छतों वाले घरों में अत्यधिक उमस के कारण वे रात में मैदान में सोने को मजबूर हैं। छोटे और तंग कमरों में वेंटिलेशन की कमी के चलते उनके लिए घरों के अंदर रहना मुश्किल हो गया है। हालांकि, मनसे ने इन दलीलों को सुरक्षा के नजरिए से अपर्याप्त माना है। पार्टी का तर्क है कि सार्वजनिक मैदानों पर अज्ञात व्यक्तियों का इस तरह जमावड़ा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। मनसे के एक पदाधिकारी ने कहा, "हमें श्रमिकों की व्यक्तिगत समस्याओं से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थलों का उपयोग इस तरह नहीं किया जाना चाहिए। हम पुलिस को पत्र लिखकर मांग कर रहे हैं कि इन सभी व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की जांच की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इनमें कोई असामाजिक या अपराधी तत्व शामिल नहीं है।" यह घटना भारत में शहरी प्रवासियों के सामने आने वाली बुनियादी ढांचागत चुनौतियों को भी उजागर करती है। यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी एक तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है, जहां बड़े शहरों में 'हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी' और प्रवासियों के रहने की स्थिति अक्सर चर्चा का विषय रहती है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा मानक और आवास नियम अलग हैं, लेकिन प्रवासियों का शहरी संसाधनों पर प्रभाव एक वैश्विक मुद्दा बना हुआ है। स्थानीय निवासियों ने इस मामले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोग सुरक्षा जांच का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि इन गरीब मजदूरों के पास गर्मी से बचने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पुलिस फिलहाल मामले की निगरानी कर रही है और मनसे के औपचारिक पत्र का इंतजार कर रही है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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