राजनीति
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल: कांग्रेस नेता ईशा खान चौधरी ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के लिए रखी शर्त
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 03:30 am
मालदा दक्षिण से कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने कहा है कि उनकी पार्टी के दरवाजे केवल 'अच्छे' तृणमूल कार्यकर्ताओं के लिए खुले हैं, जबकि 'बुरे' तत्वों के लिए रास्ता बंद है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर दलबदल और गठबंधन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मालदा दक्षिण से नवनिर्वाचित कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। चौधरी ने साफ किया है कि कांग्रेस पार्टी अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए तैयार है, लेकिन वह हर किसी को पार्टी में शामिल करने के पक्ष में नहीं है।
एक हालिया संबोधन के दौरान, ईशा खान चौधरी ने कहा कि जो तृणमूल कार्यकर्ता ईमानदार हैं और जनता की सेवा करना चाहते हैं, उनके लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा खुले हैं। हालांकि, उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जिन कार्यकर्ताओं की छवि खराब है या जो भ्रष्टाचार और असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं, उनके लिए कांग्रेस के दरवाजे का 'शटर' पूरी तरह से बंद है। उनका यह बयान उस समय आया है जब राज्य में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
चौधरी का यह रुख दर्शाता है कि कांग्रेस अब बंगाल में 'क्वालिटी ओवर क्वांटिटी' यानी संख्या बल से ज्यादा कार्यकर्ताओं की छवि पर ध्यान दे रही है। पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की राजनीति में हिंसा और भ्रष्टाचार के आरोपों ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के बीच भी इन घटनाक्रमों को लेकर खासी चर्चा रहती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक सुधारों और राजनीतिक स्थिरता पर नजर रखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईशा खान चौधरी का यह बयान केवल एक चेतावनी नहीं बल्कि संगठन को पुनर्गठित करने की एक रणनीति है। मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में कांग्रेस का पारंपरिक जनाधार रहा है, जिसे टीएमसी ने पिछले एक दशक में काफी हद तक अपनी ओर खींचा है। अब कांग्रेस उन पुराने कार्यकर्ताओं को वापस लाने की कोशिश कर रही है जो टीएमसी की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं।
ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए, भारत के क्षेत्रीय राज्यों की राजनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वहां के निवेश माहौल और सुरक्षा को प्रभावित करती है। ईशा खान चौधरी जैसे युवा नेताओं के इस तरह के कड़े रुख को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि टीएमसी नेतृत्व इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आने वाले दिनों में बंगाल की जमीनी राजनीति में क्या बदलाव आते हैं।
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