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बांकीपुर उपचुनाव: जातिगत समीकरण और राजनीतिक दावों के बीच फंसी जीत की चाबी

ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 11:31 am
बांकीपुर उपचुनाव: जातिगत समीकरण और राजनीतिक दावों के बीच फंसी जीत की चाबी

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। बीजेपी के इस गढ़ में जातिगत समीकरण और सभी पार्टियों के अपने-अपने दावे परिणाम को दिलचस्प बना रहे हैं।

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से एक विशिष्ट स्थान रखता रहा है। आगामी उपचुनाव को लेकर यहाँ की सियासी फिजां एक बार फिर गर्म हो गई है। पटना के मध्य में स्थित इस सीट को पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा है, लेकिन इस बार के समीकरण कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं। यहाँ मुकाबला केवल विकास के दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि 'अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग' की तर्ज पर हर राजनीतिक दल अपनी बिसात बिछाने में जुटा है। बांकीपुर की राजनीतिक तासीर को समझने के लिए यहाँ के जातिगत समीकरणों को देखना अनिवार्य है। जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में कायस्थ और वैश्य मतदाताओं की बड़ी आबादी है, जो दशकों से चुनावी नतीजों को प्रभावित करती रही है। बीजेपी का भरोसा इसी पारंपरिक वोट बैंक पर टिका है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन ने इस बार युवा चेहरों और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए इस किले में सेंध लगाने की पूरी कोशिश की है। जहाँ राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस का गठबंधन अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों को एकजुट करने का प्रयास कर रहा है, वहीं कुछ निर्दलीय और छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की ओर धकेल दिया है। इस चुनाव का असर केवल बिहार की सीमाओं तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में बसे बिहारी समुदाय के बीच भी बांकीपुर उपचुनाव को लेकर काफी चर्चा है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो मूल रूप से पटना और आसपास के इलाकों से ताल्लुक रखते हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। सिडनी स्थित 'बिहार एंड झारखंड सभा' जैसे संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि वे अपने गृह क्षेत्र की राजनीति पर पैनी नजर रखते हैं क्योंकि यहाँ का नेतृत्व ही राज्य के भविष्य की दिशा तय करता है। फिलहाल, बांकीपुर में हर पार्टी जीत का दावा कर रही है। सत्तारूढ़ खेमे का कहना है कि उनकी पकड़ मजबूत है, जबकि विपक्ष का तर्क है कि जनता बदलाव चाहती है और जातिगत दीवारें इस बार टूटेंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की जनता इस राजनीतिक शोर में किसकी 'राग' को अपना समर्थन देती है और क्या बीजेपी अपनी इस 'परंपरागत' सीट को बचाने में सफल हो पाती है या नहीं। चुनाव के नतीजे न केवल एक विधायक तय करेंगे, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते सामाजिक समीकरणों की नई तस्वीर भी पेश करेंगे।
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