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ऑस्ट्रेलियाई छात्र वीजा में भारी गिरावट: भूटान के 70% आवेदन खारिज, भारतीय छात्रों पर भी असर के आसार

ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 02:01 pm
ऑस्ट्रेलियाई छात्र वीजा में भारी गिरावट: भूटान के 70% आवेदन खारिज, भारतीय छात्रों पर भी असर के आसार

ऑस्ट्रेलिया ने भूटान से आने वाले छात्र वीजा आवेदनों में भारी कटौती की है, जहां पिछले छह महीनों में लगभग 70% आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा आव्रजन नियमों को कड़ा किए जाने के बाद भूटान से आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को बड़ा झटका लगा है। हालिया आंकड़ों और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले छह महीनों में भूटान से आए छात्र वीजा आवेदनों में से लगभग 70 प्रतिशत को खारिज कर दिया गया है। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया की नई आव्रजन रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में 'नेट ओवरसीज माइग्रेशन' को कम करना और शिक्षा प्रणाली की अखंडता को बनाए रखना है। भूटान में शिक्षा सलाहकारों (Education Consultants) ने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया है। उनका कहना है कि अस्वीकृति की यह दर हाल के वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले भूटान को ऑस्ट्रेलिया के लिए एक 'लो-रिस्क' बाजार माना जाता था, और बड़ी संख्या में भूटानी नागरिक पर्थ जैसे शहरों में बस रहे थे। हालांकि, अब वीजा नियमों में बदलाव और 'जेन्युइन स्टूडेंट' (Genuine Student) टेस्ट की कड़ी शर्तों ने छात्रों के लिए रास्ते कठिन कर दिए हैं। इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल भूटान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र के अन्य देशों, विशेषकर भारत के लिए भी एक चेतावनी है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समूह है और भारतीय छात्र यहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूटान के प्रति अपनाई गई यह सख्ती भारत के 'टियर 2' और 'टियर 3' शहरों से आने वाले आवेदनों पर भी लागू हो सकती है। ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्रालय अब आवेदकों की वित्तीय क्षमता और उनके पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड की सूक्ष्मता से जांच कर रहा है। शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वीजा रिजेक्शन बढ़ने का मुख्य कारण ऑस्ट्रेलिया में बढ़ता आवास संकट (Housing Crisis) भी है। सरकार पर घरेलू स्तर पर दबाव है कि वह प्रवासियों की संख्या को नियंत्रित करे ताकि बुनियादी ढांचे और संसाधनों पर बोझ कम हो सके। इसके परिणामस्वरूप, कई उच्च-गुणवत्ता वाले आवेदकों को भी छोटी-छोटी तकनीकी कमियों के आधार पर वीजा देने से मना किया जा रहा है। भूटानी छात्रों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया उनके लिए उच्च शिक्षा और रोजगार का सबसे प्रमुख गंतव्य रहा है। पर्थ में रहने वाले भूटानी समुदाय ने भी इस बदलाव पर चिंता जताई है, क्योंकि नए छात्रों के न आने से सामुदायिक नेटवर्क और स्थानीय व्यवसायों पर असर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में, यदि यही रुख बरकरार रहा, तो अंतरराष्ट्रीय शिक्षा उद्योग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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