ऑस्ट्रेलिया
प्रशांत देशों के नेताओं की मेजबानी करेगा ऑस्ट्रेलिया; क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने की तैयारी
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 05:31 am
प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस प्रशांत द्वीप समूह के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की पकड़ मजबूत करना और चीन की बढ़ती भूमिका को संतुलित करना है।
कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस प्रशांत द्वीप समूह के नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं। यह कूटनीतिक कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता और सैन्य विस्तार ने ऑस्ट्रेलिया और उसके पश्चिमी सहयोगियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया को 'पसंदीदा सुरक्षा भागीदार' के रूप में फिर से स्थापित करना है।
हाल के वर्षों में, चीन ने सोलोमन द्वीप समूह और अन्य प्रशांत देशों के साथ बुनियादी ढांचे और सुरक्षा समझौतों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके जवाब में, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपनी 'पैसिफिक स्टेप-अप' नीति को और अधिक आक्रामक बना दिया है। इस वार्ता के दौरान, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक विकास जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अल्बनीस सरकार प्रशांत देशों को यह विश्वास दिलाना चाहती है कि ऑस्ट्रेलिया केवल एक रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने वाला एक भरोसेमंद पड़ोसी भी है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत, क्वाड (Quad) का एक प्रमुख सदस्य होने के नाते, एक स्वतंत्र और खुले 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र का पक्षधर है। भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और ऑस्ट्रेलिया की प्रशांत क्षेत्र के प्रति सक्रियता एक ही लक्ष्य की ओर इशारा करती हैं—क्षेत्रीय स्थिरता। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा रक्षा, विदेश नीति और व्यापार के क्षेत्र से जुड़ा है, जो इन कूटनीतिक बदलावों को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में 'प्रशांत पुलिसिंग पहल' (Pacific Policing Initiative) पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिसे चीन के बढ़ते पुलिस और सुरक्षा सहयोग के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिए विशेष वीजा योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की घोषणा की है। सरकार का तर्क है कि स्थानीय समुदायों की जरूरतों को पूरा करके ही बाहरी ताकतों के अनावश्यक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
हालांकि, अल्बनीस के लिए यह राह आसान नहीं होगी। प्रशांत देशों के नेताओं ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वे महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता में मोहरा नहीं बनना चाहते। उनके लिए जलवायु परिवर्तन एक 'अस्तित्वगत खतरा' है, और वे उम्मीद करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को लेकर अधिक गंभीर होगा। आगामी चर्चाओं में यह देखना दिलचस्प होगा कि ऑस्ट्रेलिया किस प्रकार सुरक्षा चिंताओं और प्रशांत देशों की विकास प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बिठाता है।
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