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असम में वयस्कों के लिए आधार कार्ड जारी करने के नियमों में सख्ती, घुसपैठ रोकने के लिए सीएम सरमा का बड़ा फैसला
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 09:31 pm
असम सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान की जा सके।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा की है। राज्य सरकार ने अब 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया है। नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी वयस्क को आधार कार्ड तभी जारी किया जाएगा जब उसे जिला कलेक्टर (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) की अनुमति प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह कदम संदिग्ध क्षेत्रों से होने वाली अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के कुछ जिलों में आधार आवेदकों की संख्या जनसंख्या के अनुपात से अधिक पाई गई है, जो इस बात का संकेत है कि सीमा पार से आए लोग अवैध रूप से दस्तावेज बनवाने का प्रयास कर रहे हैं। असम में अब नया आधार कार्ड बनवाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होगी, विशेष रूप से उन जिलों में जहां घुसपैठ की समस्या गंभीर है।
नई प्रक्रिया के तहत, 18 वर्ष से अधिक आयु के आवेदकों को अपनी नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में कड़ी जांच से गुजरना होगा। केवल उन लोगों को छूट दी जाएगी जिनके पास पहले से ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) की आवेदन रसीद संख्या (ARN) है। सीएम सरमा ने कहा कि यह अनिवार्य कर दिया गया है कि कोई भी नया आधार कार्ड सीधे तौर पर जारी नहीं किया जाएगा; इसके बजाय, आवेदनों को गहन सत्यापन के लिए जिला अधिकारियों के पास भेजा जाएगा।
यह निर्णय असम के जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार राज्य के 'अल्पसंख्यक बहुल' जिलों में आधार पंजीकरण की विशेष निगरानी करेगी। डेटा का विश्लेषण करने पर सरकार ने पाया कि कुछ क्षेत्रों में आधार कवरेज 100 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो अवैध प्रविष्टियों की पुष्टि करता है।
प्रवासी भारतीय समुदायों, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे असमिया प्रवासियों के लिए यह समाचार महत्वपूर्ण है। भारत में पहचान संबंधी दस्तावेजों के नियमों में बदलाव अक्सर उन एनआरआई (NRI) परिवारों को प्रभावित करते हैं जिनके सदस्य अभी भी भारत में हैं या जो अपनी संपत्ति और पहचान के कार्यों के लिए भारतीय दस्तावेजों पर निर्भर हैं। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह सख्ती नए आवेदकों के लिए है, न कि उनके लिए जो पहले से ही वैध आधार कार्ड धारक हैं।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि राज्य सरकार अवैध प्रवास के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है। यह नया नियम न केवल सरकारी लाभों के दुरुपयोग को रोकेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके। आने वाले समय में, यह प्रक्रिया अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है जो घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे हैं।
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