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असम में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए आधार पंजीकरण पर रोक, मुख्यमंत्री ने अवैध प्रवासियों पर कसा शिकंजा

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 10:01 am
असम में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए आधार पंजीकरण पर रोक, मुख्यमंत्री ने अवैध प्रवासियों पर कसा शिकंजा

असम सरकार ने राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें रोकने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को नया आधार कार्ड जारी करने पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

असम सरकार ने राज्य में अवैध प्रवासन की समस्या से निपटने के लिए एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को गुवाहाटी में आयोजित एक कैबिनेट बैठक के बाद घोषणा की कि अब से राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को नया आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह कदम अवैध प्रवासियों को आधिकारिक दस्तावेज हासिल करने से रोकने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन जिलों में विशेष रूप से प्रभावी होगा जहां जनसंख्या में संदिग्ध वृद्धि देखी गई है। सरकार के अनुसार, वयस्क होने के बाद आधार के लिए आवेदन करने वालों की जांच अब और भी गहनता से की जाएगी। हालांकि, यह नियम उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके पास पहले से ही आधार कार्ड मौजूद है या जिन्होंने 18 वर्ष की आयु से पहले अपना पंजीकरण करा लिया था। इस नीति के तहत, अब 18 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी नए आवेदक को आधार के लिए आवेदन करते समय अपने क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है कि केवल वैध भारतीय नागरिक ही इस विशिष्ट पहचान संख्या को प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के चार जिलों में आधार आवेदकों की संख्या वहां की कुल अनुमानित जनसंख्या से अधिक पाई गई है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और विशेष रूप से असमिया प्रवासियों के लिए यह समाचार महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई प्रवासी अपने परिवारों के दस्तावेजों के नवीनीकरण या नए पंजीकरण के लिए नियमित रूप से भारत आते रहते हैं। एनआरआई (NRI) समुदाय को सलाह दी जाती है कि वे असम में अपने परिजनों के आधार पंजीकरण से संबंधित इन नए नियमों का ध्यान रखें, ताकि भविष्य में उन्हें किसी कानूनी या प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े। असम सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और नागरिकता से जुड़े अन्य मुद्दों के प्रति राज्य की संवेदनशीलता को दर्शाता है। सरकार का तर्क है कि आधार को अक्सर नागरिकता के प्रमाण के रूप में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, जबकि यह केवल एक पहचान और पते का प्रमाण है। इस सख्ती के माध्यम से प्रशासन सुरक्षा और जनसांख्यिकीय स्थिरता बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। आने वाले हफ्तों में इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है।
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