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अरियालुर: किसानों ने मांगों को लेकर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, एसोसिएशन की बैठक में गरमाया माहौल

ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 07:35 pm
अरियालुर: किसानों ने मांगों को लेकर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, एसोसिएशन की बैठक में गरमाया माहौल

तमिलनाडु के अरियालुर में किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में एसोसिएशन की बैठक के दौरान काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।

तमिलनाडु के अरियालुर जिले में कृषि संकट और किसानों की अनसुनी मांगों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। हाल ही में आयोजित एक प्रमुख एसोसिएशन की बैठक में क्षेत्र के किसानों ने सामूहिक रूप से काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह विरोध प्रदर्शन महज एक सांकेतिक कार्य नहीं था, बल्कि प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ किसानों के बढ़ते गुस्से का प्रतिबिंब था। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र गन्ने के बकाया भुगतान, फसल बीमा में देरी और सिंचाई के लिए पानी के उचित वितरण जैसे मुद्दे रहे। अरियालुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में खेती मुख्य व्यवसाय है, और यहां के किसान मुख्य रूप से गन्ने और धान की खेती पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि चीनी मिलों द्वारा उनके पुराने भुगतान अभी तक नहीं किए गए हैं, जिसके कारण वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। बैठक में मौजूद किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन और अधिक तीव्र होगा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से तमिलनाडु के प्रवासी जो वहां 'तमिल डायस्पोरा' का हिस्सा हैं, इन घटनाओं को बड़ी संवेदनशीलता के साथ देख रहे हैं। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में बसे कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई मूल रूप से कृषि परिवारों से आते हैं और उनके परिवारों का एक बड़ा हिस्सा आज भी अरियालुर जैसे क्षेत्रों में खेती से जुड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में बैठे ये लोग न केवल अपने पैतृक गांवों में वित्तीय सहायता भेजते हैं, बल्कि वहां की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव रखते हैं। भारत में किसानों का संघर्ष प्रत्यक्ष रूप से इन प्रवासियों की मानसिक और आर्थिक चिंताओं को बढ़ाता है। एसोसिएशन की इस बैठक में किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, लेकिन काली पट्टी बांधकर उन्होंने यह संदेश दिया कि वे अब और प्रतीक्षा करने के मूड में नहीं हैं। स्थानीय प्रशासन ने हालांकि आश्वासन दिया है कि मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन किसानों का तर्क है कि ऐसे आश्वासन पहले भी कई बार मिल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन बुनियादी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो इसका असर आगामी फसल सत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आईसीएन24 (ICN24) से बात करते हुए, कुछ किसान संगठनों ने संकेत दिया है कि वे आने वाले दिनों में जिला कलेक्ट्रेट के सामने बड़ा प्रदर्शन कर सकते हैं। फिलहाल, अरियालुर की यह घटना तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त असंतोष की एक और कड़ी है, जो वैश्विक स्तर पर बसे भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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