लाइव
इमिकास्ट
इमिकास्ट

क्या अनिवासी भारतीय (NRIs) वापस लौट रहे हैं? बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का आकर्षण

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 06:00 pm
क्या अनिवासी भारतीय (NRIs) वापस लौट रहे हैं? बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का आकर्षण

वैश्विक इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव और अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के सख्त रुख के बीच, क्या अब भारतीय प्रवासी स्वदेश वापसी की राह देख रहे हैं? जानिए आईसीएम24 की विशेष रिपोर्ट।

पिछले कुछ दशकों से भारतीय प्रतिभाओं का विदेशों की ओर पलायन एक सामान्य प्रक्रिया रही है, लेकिन हाल के वर्षों में 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' या स्वदेश वापसी की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। विशेष रूप से अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के आने और उनकी सख्त इमिग्रेशन नीतियों के संकेतों के बाद, कई अनिवासी भारतीयों (NRIs) के मन में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है। यह स्थिति न केवल अमेरिका में रह रहे भारतीयों को प्रभावित कर रही है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में बसे प्रवासी समुदाय के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अमेरिका में एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड की प्रक्रियाओं को लेकर बढ़ती सख्ती ने पेशेवरों को वैकल्पिक रास्तों पर विचार करने के लिए मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी देश की आव्रजन नीतियां केवल 'स्थानीय प्रथम' के नारे पर केंद्रित हो जाती हैं, तो कुशल प्रवासियों के लिए वहां टिके रहना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसी स्थिति में भारत, जो वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, एक आकर्षक विकल्प के रूप में उभर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो, यहां का भारतीय समुदाय भी इन वैश्विक बदलावों को बारीकी से देख रहा है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन के नियम अमेरिका जितने अस्थिर नहीं रहे हैं, लेकिन यहां भी हाल के दिनों में वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास (PR) की शर्तों में कुछ बदलाव किए गए हैं। मेलबर्न और सिडनी में बसे कई भारतीय आईटी पेशेवर और उद्यमी अब भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं। बैंगलोर, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे शहर अब वैश्विक मानकों के अनुरूप अवसर प्रदान कर रहे हैं, जो वापसी के निर्णय को आसान बना देते हैं। वापसी का एक बड़ा कारण भावनात्मक और सामाजिक भी है। कोरोना महामारी के बाद से कई परिवारों ने अपनों के करीब रहने की आवश्यकता महसूस की है। इसके अलावा, भारत में डिजिटल क्रांति और बेहतर बुनियादी ढांचे ने जीवन स्तर में सुधार किया है। हालांकि, भारत लौटने की राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ट्रैफिक, प्रदूषण और नौकरशाही जैसी समस्याएं अभी भी प्रवासियों के लिए बड़ी बाधाएं हैं। निष्कर्षतः, क्या वाकई भारतीय बड़े पैमाने पर लौट रहे हैं? इसका उत्तर मिश्रित है। जहां एक ओर वीजा अनिश्चितता प्रवासियों को पीछे धकेल रही है, वहीं भारत की आर्थिक प्रगति उन्हें आकर्षित कर रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब 'विदेश जाना' एकमात्र सफलता का पैमाना नहीं रह गया है। आने वाले वर्षों में ट्रंप प्रशासन की नीतियां और भारत की जीडीपी ग्रोथ यह तय करेगी कि यह 'रिवर्स माइग्रेशन' केवल एक लहर है या एक स्थायी बदलाव।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

वन नेशन का बड़ा वादा: ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों से 'वेलकम टू कंट्री' हटाने और देशभक्ति पर जोर देने की तैयारी
इमिग्रेशन

वन नेशन का बड़ा वादा: ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों से 'वेलकम टू कंट्री' हटाने और देशभक्ति पर जोर देने की तैयारी

वन नेशन नेता पॉलीन हैनसन ने ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में देशभक्ति आधारित पाठ्यक्रम और 'वेलकम टू कंट्री' समारोहों को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।

30 जुल॰ 2026, 07:45 am
विकास रम्बल के पर्डामन ग्रुप की बड़ी पहल: ऑस्ट्रेलिया में दशकों बाद बन सकती है पहली बड़ी तेल रिफाइनरी
इमिग्रेशन

विकास रम्बल के पर्डामन ग्रुप की बड़ी पहल: ऑस्ट्रेलिया में दशकों बाद बन सकती है पहली बड़ी तेल रिफाइनरी

भारतीय मूल के उद्यमी विकास रम्बल के पर्डामन ग्रुप ने ऑस्ट्रेलिया की ईंधन सुरक्षा और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कर्रथा में एक नई तेल रिफाइनरी का प्रस्ताव दिया है।

29 जुल॰ 2026, 05:27 am
'व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पॉलिसी' खत्म होने से शुरू हुई आव्रजन की समस्याएं: पॉलीन हैंसन
इमिग्रेशन

'व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पॉलिसी' खत्म होने से शुरू हुई आव्रजन की समस्याएं: पॉलीन हैंसन

वन नेशन नेता पॉलीन हैंसन ने दावा किया है कि ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा आव्रजन चुनौतियां 1970 के दशक में 'व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पॉलिसी' के अंत के साथ शुरू हुई थीं।

17 जुल॰ 2026, 09:27 am