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वंदे मातरम के दो छंदों पर अमित शाह का कांग्रेस पर निशाना; 1937 के फैसले को बताया 'तुष्टिकरण'

ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 10:39 pm
वंदे मातरम के दो छंदों पर अमित शाह का कांग्रेस पर निशाना; 1937 के फैसले को बताया 'तुष्टिकरण'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस द्वारा 1937 में वंदे मातरम के केवल दो छंदों को अपनाने के फैसले की आलोचना की है, इसे देश की सांस्कृतिक एकता के खिलाफ बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला करते हुए राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर लिए गए एक ऐतिहासिक फैसले पर सवाल उठाए हैं। शाह ने 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए उस निर्णय की आलोचना की, जिसके तहत राष्ट्रगीत के केवल पहले दो छंदों को ही गाने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने इस कदम को 'तुष्टिकरण की राजनीति' का एक बड़ा उदाहरण बताया और दावा किया कि इसी मानसिकता ने देश के विभाजन की नींव रखी थी। गृह मंत्री ने एक हालिया संबोधन के दौरान कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र था। उन्होंने तर्क दिया कि जब पूरे देश में आजादी की लहर दौड़ रही थी, तब कांग्रेस ने कुछ वर्गों को खुश करने के लिए इस गीत को छोटा कर दिया। शाह के अनुसार, 1937 के कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के प्रस्ताव ने देश की अखंडता और सांस्कृतिक गौरव के साथ समझौता किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार राष्ट्रीय प्रतीकों के पूर्ण सम्मान और उनकी गरिमा को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इतिहास का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' ने क्रांतिकारियों में जोश भरने का काम किया था। 1937 में कोलकाता में हुई कांग्रेस की बैठक में यह तय किया गया था कि गीत के केवल वे हिस्से गाए जाएंगे जो सीधे तौर पर मातृभूमि की प्रशंसा करते हैं, ताकि अन्य समुदायों की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। शाह ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह देश की आत्मा को विभाजित करने जैसा था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह बहस विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में होने वाले स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों में 'वंदे मातरम' बड़े गर्व के साथ गाया जाता है। प्रवासी भारतीयों के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर एक गहरी संवेदनशीलता होती है, और भारत में चल रही इस राजनीतिक बहस का असर सोशल मीडिया के जरिए वैश्विक स्तर पर रह रहे भारतीयों पर भी पड़ता है। कई प्रवासी संगठन इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या ऐतिहासिक सुधार वर्तमान समय में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शाह का यह बयान आने वाले चुनावों से पहले सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को गरमाने की एक कोशिश है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति की अनदेखी करने का आरोप लगाती रही है, जबकि कांग्रेस इन आरोपों को इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश करार देती है। फिलहाल, 'वंदे मातरम' के पूर्ण गायन और इसके ऐतिहासिक संदर्भों पर शुरू हुई यह बहस भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय मूल के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
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