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अमरनाथ यात्रा ने रचा इतिहास: 12 दिनों में 3 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, टूटा पिछला रिकॉर्ड
ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 02:31 am

श्री अमरनाथ जी यात्रा ने केवल 12 दिनों में 3 लाख का आंकड़ा पार कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जो हाल के वर्षों में सबसे तेज़ वृद्धि है।
जम्मू-कश्मीर की वार्षिक श्री अमरनाथ जी यात्रा ने इस वर्ष आस्था और भक्ति का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यात्रा शुरू होने के मात्र 12 दिनों के भीतर ही 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में विराजमान 'बाबा बर्फानी' के दर्शन किए हैं। यह संख्या न केवल इस वर्ष के उत्साह को दर्शाती है, बल्कि पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। प्रशासन और तीर्थयात्रियों दोनों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का प्रबंधन और सुरक्षा एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल, दोनों ही मार्गों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस वर्ष यात्रा की गति इतनी तीव्र है कि इसे हाल के इतिहास में सबसे तेजी से बढ़ने वाली तीर्थयात्राओं में से एक माना जा रहा है। मौसम की अनुकूलता और सरकार द्वारा किए गए पुख्ता इंतजामों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उपराज्यपाल प्रशासन और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (SASB) ने यात्रियों के लिए विशेष सुविधाओं का विस्तार किया है, जिसमें स्वास्थ्य शिविर, लंगर सेवा और बेहतर सड़क संपर्क शामिल हैं।
सुरक्षा के मोर्चे पर, केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान दिन-रात मुस्तैद हैं ताकि श्रद्धालु बिना किसी भय के अपनी यात्रा पूरी कर सकें। आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन निगरानी और आरएफआईडी (RFID) टैगिंग का उपयोग प्रत्येक यात्री की सुरक्षा और स्थिति पर नज़र रखने के लिए किया जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। हाल के वर्षों में सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों से बड़ी संख्या में एनआरआई (NRI) और भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं। डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार और बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी के कारण अब विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ना और इस कठिन तीर्थयात्रा का हिस्सा बनना आसान हो गया है। कई ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय परिवारों ने इस रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों को भारत में बढ़ते बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा है।
जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ रही है, प्रशासन को उम्मीद है कि इस साल कुल तीर्थयात्रियों की संख्या पिछले सभी रिकॉर्डों को पार कर जाएगी। अधिकारियों ने आने वाले दिनों में और अधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें और ऊंचे क्षेत्रों में ऑक्सीजन के स्तर को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ें। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था और 'कश्मीरियत' की संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करती है।
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