ऑस्ट्रेलिया
एडिलेड में बुल-राइडिंग की वापसी पर विवाद: पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और आयोजकों के बीच छिड़ी बहस
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 11:39 pm

एडिलेड में प्रोफेशनल बुल राइडिंग की वापसी ने पशु कल्याण को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जहां कार्यकर्ता इसे क्रूरता बता रहे हैं और आयोजक इसे खेल का हिस्सा।
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की राजधानी एडिलेड में एक बार फिर धूल और रोमांच का माहौल है, लेकिन इस बार मनोरंजन के साथ-साथ विरोध के स्वर भी तेज हैं। प्रोफेशनल बुल राइडर्स (PBR) के एडिलेड लौटने की घोषणा के बाद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने जानवरों के प्रति क्रूरता का हवाला देते हुए इस आयोजन पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। जहाँ एक ओर खेल प्रेमी इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर 'एनिमल लिबरेशन' जैसे संगठन इसे प्रतिबंधित करने की मांग कर रहे हैं।
पशु अधिकार समूहों का तर्क है कि बुल राइडिंग में सांडों को उत्तेजित करने के लिए 'फ्लैंक स्ट्रैप' और स्पर्स (पैरों में पहने जाने वाले नुकीले उपकरण) का उपयोग किया जाता है, जिससे जानवर अत्यधिक तनाव और दर्द में आ जाते हैं। कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह मनोरंजन के नाम पर जानवरों का शोषण है और आधुनिक समाज में इस तरह के 'अमानवीय' खेलों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। विरोध प्रदर्शनों की योजना बना रहे इन संगठनों का कहना है कि बुल राइडिंग के दौरान सांडों को चोट लगने का भी बड़ा जोखिम रहता है।
दूसरी ओर, पीबीआर (PBR) के आयोजकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इन सांडों को 'कुलीन एथलीटों' की तरह माना जाता है और उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि बुल राइडिंग के लिए विशेष नियमों का पालन किया जाता है, जिसमें पशु चिकित्सकों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। उनके अनुसार, सांडों के व्यवहार और उनके प्रदर्शन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें कोई शारीरिक क्षति न पहुंचे।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह मुद्दा काफी परिचित हो सकता है। भारत में भी 'जल्लीकट्टू' जैसे सांडों से जुड़े पारंपरिक खेलों को लेकर इसी तरह की बहस दशकों से चली आ रही है। जहाँ एक पक्ष इसे संस्कृति और बहादुरी का प्रतीक मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे पशु क्रूरता के चश्मे से देखता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए, स्थानीय संस्कृति के इस पहलू को समझना दिलचस्प है, क्योंकि यहाँ भी परंपरा और आधुनिक नैतिकता के बीच संघर्ष दिखाई दे रहा है।
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के नियमों के अनुसार, रोडियो और बुल राइडिंग के आयोजनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। हालांकि, कार्यकर्ताओं का मानना है कि ये नियम पर्याप्त नहीं हैं। आने वाले दिनों में एडिलेड एंटरटेनमेंट सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शनों की संभावना है, जो यह दर्शाता है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों को लेकर दबाव बना रहेगा। एडिलेड में बुल राइडिंग की वापसी ने न केवल खेल जगत में उत्साह भरा है, बल्कि पशु अधिकारों को लेकर सामाजिक चेतना को भी झकझोर दिया है।
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