राजनीति
फूलों की वर्षा और आस्था का सैलाब: भव्य स्वरूप में शुरू हुआ तारकेश्वर का श्रावणी मेला
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 03:34 am

पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारकेश्वर धाम में श्रावणी मेले का भव्य आगाज़ हुआ है। प्रशासन द्वारा की गई विशेष व्यवस्थाओं के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा तारकनाथ का जलाभिषेक किया।
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में स्थित प्रसिद्ध शिव तीर्थ तारकेश्वर में इस वर्ष श्रावणी मेले का आयोजन एक नए और भव्य स्वरूप में शुरू हुआ है। सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही पूरा क्षेत्र 'बोम बोम तारक' के जयघोष से गूंज उठा है। इस वर्ष मेले का विशेष आकर्षण श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से की गई गुलाब के फूलों की वर्षा रही, जिसने धार्मिक उत्सव को एक नया आयाम दिया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे अब तक का सबसे व्यवस्थित आयोजन माना जा रहा है, जिसमें राजनीति और लोक-कल्याण का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
राज्य सरकार ने इस विशाल समागम को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजाम किए हैं। शेओराफुली घाट से लेकर तारकेश्वर मंदिर तक के पूरे रास्ते में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पूरी सड़क पर अस्थायी शेड, पेयजल केंद्र और चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार और झारखंड के देवघर की तर्ज पर बंगाल के तारकेश्वर को भी एक प्रमुख राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस तरह के बड़े आयोजनों का प्रबंधन सरकार की प्रशासनिक क्षमता का प्रदर्शन होता है। राज्य पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का व्यापक जाल बिछाया है। साथ ही, हजारों की संख्या में स्वयंसेवकों और नागरिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारी बारिश की संभावना को देखते हुए जल निकासी और आपदा प्रबंधन की टीमें भी मुस्तैद की गई हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए तारकेश्वर का यह मेला गहरी सांस्कृतिक जड़ों का प्रतीक है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो सावन के दौरान स्थानीय मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं, उनके लिए तकनीक के माध्यम से अपने पैतृक स्थान की इस भव्यता को देखना एक भावनात्मक अनुभव है। सिडनी स्थित 'बंगाली कल्चरल एसोसिएशन' के सदस्यों का कहना है कि तारकेश्वर मेले का यह आधुनिक अवतार वैश्विक स्तर पर भारतीय परंपराओं की बदलती और सशक्त होती छवि को दर्शाता है।
जैसे-जैसे सावन का महीना आगे बढ़ेगा, श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंचने की उम्मीद है। तारकेश्वर मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय नगर पालिका ने मिलकर कचरा प्रबंधन और स्वच्छता अभियान पर भी विशेष जोर दिया है। इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को बल दिया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान की है, जिससे हजारों छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं को लाभ मिल रहा है।
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