लाइव
राजनीति
राजनीति

डिजिटल बगावत की दस्तक: क्या भारतीय राजनीति में बदलाव ला पाएंगे शिक्षित युवा?

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 07:30 am
डिजिटल बगावत की दस्तक: क्या भारतीय राजनीति में बदलाव ला पाएंगे शिक्षित युवा?

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में तीन युवाओं द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भारतीय राजनीति में शिक्षित युवाओं की भागीदारी और डिजिटल सक्रियता पर नए सवाल खड़े कर रहा है।

नई दिल्ली के ऐतिहासिक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अक्सर अनुभवी राजनेताओं और पारंपरिक रैलियों का जमावड़ा देखा जाता है, लेकिन हाल ही में वहां एक अलग दृश्य देखने को मिला। तीन उच्च शिक्षित युवाओं ने मंच संभालते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर एक नई बहस छेड़ दी है। इसे 'डिजिटल बगावत' का नाम दिया जा रहा है, जो पारंपरिक राजनीति के स्थापित मानदंडों को चुनौती देने की तैयारी में है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राजनीति को केवल नारों और रैलियों तक सीमित न रखकर, उसे तथ्यों, डेटा और युवाओं की वास्तविक समस्याओं से जोड़ना है। मंच पर मौजूद युवाओं ने तर्क दिया कि भारत की मौजूदा राजनीतिक संरचना में शिक्षित युवाओं के लिए जगह कम है, जिसके कारण देश की नीतियां अक्सर जमीनी हकीकत से दूर रहती हैं। उन्होंने तकनीक और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल के जरिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की बात कही, जहां नीतियां बनाने में आम नागरिक की सीधी भागीदारी हो। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी मातृभूमि की राजनीतिक स्थिरता और वहां की शिक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद करते हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय छात्र और पेशेवर, जो खुद एक आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा हैं, भारत में भी इसी तरह के बदलाव देखना चाहते हैं। यह डिजिटल आंदोलन उन युवाओं को अपनी आवाज उठाने का मौका दे सकता है जो भौगोलिक दूरियों के बावजूद भारत की प्रगति में योगदान देना चाहते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि क्या यह डिजिटल सक्रियता वास्तव में वोटों में तब्दील हो पाएगी, यह एक बड़ा सवाल है। भारत की राजनीति में जाति, धर्म और क्षेत्रीय समीकरण आज भी हावी हैं। ऐसे में केवल डिजिटल पहुंच और शिक्षा के दम पर पारंपरिक राजनीतिक दलों का मुकाबला करना एक कठिन चुनौती होगी। क्या यह 'डिजिटल बगावत' केवल एक सांकेतिक विरोध बनकर रह जाएगी या यह 2024 और उसके बाद की राजनीति का रुख मोड़ देगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय युवा अब केवल मतदाता बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि वे व्यवस्था परिवर्तन के मुख्य सूत्रधार बनना चाहते हैं। शिक्षित युवाओं का राजनीति की मुख्यधारा में आने का प्रयास लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ संकेत माना जा सकता है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

नूंह में ब्रजमंडल शोभायात्रा को लेकर सुरक्षा चाक-चौबंद: प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर
राजनीति

नूंह में ब्रजमंडल शोभायात्रा को लेकर सुरक्षा चाक-चौबंद: प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर

हरियाणा के नूंह में 3 अगस्त को निकलने वाली ब्रजमंडल शोभायात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है।

27 जुल॰ 2026, 05:36 pm
गंगा पर चिकन खाना अपराध नहीं, कोई कानून इसे नहीं रोकता: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां
राजनीति

गंगा पर चिकन खाना अपराध नहीं, कोई कानून इसे नहीं रोकता: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने वाराणसी में 14 युवकों की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा कि खान-पान की पसंद पर कोई कानूनी रोक नहीं है।

27 जुल॰ 2026, 04:37 pm
'गंगा पर चिकन खाना कोई अपराध नहीं': जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने नागरिक अधिकारों के हनन पर जताई चिंता
राजनीति

'गंगा पर चिकन खाना कोई अपराध नहीं': जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने नागरिक अधिकारों के हनन पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उज्ज्वल भुइयां ने नागरिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि गंगा में नाव पर चिकन खाना या विरोध प्रदर्शन करना कानूनन अपराध नहीं है।

27 जुल॰ 2026, 04:36 pm