ऑस्ट्रेलिया
2026 की जनगणना बताएगी कि कैसे संकटों ने ऑस्ट्रेलियाई समाज को बदला: विशेषज्ञ
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 01:37 pm
चार्ल्स डार्विन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 की जनगणना कोविड-19 और आवास संकट के बाद ऑस्ट्रेलियाई समाज में आए बदलावों का महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगी।
ऑस्ट्रेलिया में 2026 में होने वाली आगामी जनगणना केवल एक संख्यात्मक अभ्यास नहीं होगी, बल्कि यह इस बात का एक विस्तृत दस्तावेज़ होगी कि कैसे पिछले कुछ वर्षों के संकटों ने देश की सामाजिक और आर्थिक बुनियाद को बदल दिया है। चार्ल्स डार्विन यूनिवर्सिटी (CDU) के एक प्रमुख जनसांख्यिकी विशेषज्ञ (Demographer) के अनुसार, यह डेटा विशेष रूप से यह समझने में मदद करेगा कि कोविड-19 महामारी, आवास संकट और आसमान छूती महंगाई ने नागरिकों के जीवन को किस तरह प्रभावित किया है।
पिछली जनगणना 2021 में आयोजित की गई थी, जब ऑस्ट्रेलिया और पूरी दुनिया महामारी के बीच में थी। उस समय कई राज्यों में लॉकडाउन लागू था और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद थीं। विशेषज्ञ का कहना है कि 2021 और 2026 के बीच का समय ऑस्ट्रेलिया के इतिहास के सबसे अस्थिर दौर में से एक रहा है। इस अवधि में ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों, विशेष रूप से प्रवासी समुदायों ने भारी सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल का सामना किया है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह जनगणना अत्यधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रवासी समूहों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का डेटा यह दिखाएगा कि कैसे आवास की बढ़ती कीमतों ने भारतीय प्रवासियों को सिडनी और मेलबर्न जैसे महंगे महानगरों से हटकर क्षेत्रीय शहरों (Regional areas) की ओर रुख करने पर मजबूर किया है। इसके अलावा, वर्क-फ्रॉम-होम संस्कृति के उदय ने भी रिहायशी पैटर्न को बदला है, जिसे यह जनगणना स्पष्ट रूप से उजागर करेगी।
आवास की सामर्थ्य (Housing affordability) एक और प्रमुख मुद्दा है जो इस जनगणना के केंद्र में होगा। बढ़ते रेंट और होम लोन की ब्याज दरों ने कई परिवारों की बचत और खर्च करने की क्षमता को प्रभावित किया है। जनगणना के आंकड़े यह बताएंगे कि कितने लोग अब साझा घरों (Share houses) में रहने को मजबूर हैं या क्या 'मल्टी-जनरेशनल' घरों (एक ही घर में कई पीढ़ियों का साथ रहना) की संख्या में वृद्धि हुई है, जो भारतीय संस्कृति में पहले से ही प्रचलित है लेकिन अब आर्थिक मजबूरी भी बनता जा रहा है।
अंततः, 2026 की जनगणना सरकार के लिए भविष्य की नीतियों को तैयार करने का आधार बनेगी। इसमें बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में योजना बनाने के लिए सटीक डेटा मिलेगा। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए यह अपनी बदलती जरूरतों और समाज में अपने योगदान को दर्ज कराने का एक बड़ा अवसर होगा।
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